आपके अवचेतन मन की शक्ति


<!– –>

हमारे अवचेतन मन में इतनी शक्ति है कि हम जो चाहे इससे करवाले बट हमें यह पता होना चाहिए कि हम इस का कैसे प्रयोग करें। पहले मैं बताना चाहता हूं कि बहुत से लोग यह नहीं जानते कि उनके पास यह शक्ति है भी कि नहीं है। आपके पास भी यह शक्ति है। बट आपको उस शक्ति में पूरी तरह से बिलीव करना होगा तब जाकर यह शक्ति काम करती है हमारे माइंड के पास इतनी शक्ति है कि यह सब कुछ  कर सकती हैं। पर हमें इसका सही इस्तेमाल करना होगा आप जानते हैं कि हमारे दिमाग के दो भाग हैं पहला अवचेतन मन तथा दूसरा चेतन मन है। चेतन मन तार्किक कार्य को करता है ,चेतन मन निर्णय लेता है। किसी कार्य को करने में हेल्प करता है लेकिन अवचेतन मन चेतन मन के द्वारा दी गई संदेश को फॉलो करता है यह उसमें किसी प्रकार का चेंज नहीं करता।


<!– –>

जब हम सो जाते हैं तब भी हमारा अवचेतन मन काम करता रहता है ।आप जैसे आप में देख सकते हो कि हम हमेशा सांस लेते हैं, हमारा रक्त हमेशा चलता रहता है। यह सारी अनैच्छिक क्रियाओं को संतुलित करता है। यह हमेशा काम करता रहता है ।यह यह सोने के 5 मिनट पहले इतना शक्तिशाली होता है कि हम जो इसको आदेश देते हैं उसको यह स्वीकार कर लेता है तथा उसकी वाइब्रेशन को वायुमंडल में फैला देता है जिससे कि वह काम की शुरुआत हो जाती है यह सोने के 5 मिनट पहले और जागने के 5 मिनट बाद बहुत ही स्ट्रांग होता है इसमें आप जो अपनी लाइफ में चाहते हो उसे यह संदेश देकर आप अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं पर हमें पूरा विश्वास होना चाहिए इन इच्छाओं में की यह पूरा होगा।


<!– –>

 एक कहानी के तहत मैं इसे समझाने की कोशिश करता हूं एक बार एक आदमी बीमार पड़ जाता है उसका बहुत इलाज होता है और वह ठीक नहीं हो पाता। एक दिन  उसका लड़का घर आया  और अपने पिताजी से बोला पिताजी मैंने एक महात्मा से आपके बीमारी के बारे में बताया तब उन्होंने बहुत पूजा पाठ करके एक अंगूठी दी है। जिसे आपको अपने माथे से लगाकर अपने अंगुलि में पहनना है और आपको इसमें पूरा विश्वास होना चाहिए तब जाकर ये काम करेगा और आप बिल्कुल पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे यह सुनते ही उसके पिता ने अंगूठी बेटे के हाथ से ले ली और पूरी विश्वास के साथ उसे अपने माथे से लगाया और उसे पहन लिया और उसका आस्था इतना बढ़ गया कि उसे बिलीव होने लगा कि वह ठीक हो जाएगा और उसकी बीमारी धीरे-धीरे दूर होने लगी और हालत में सुधार होने लगा आपको क्या लगता है? कि उस लड़के ने जो अंगूठी दी थी वह किसी महात्मा ने दी थी, नहीं वह अंगूठी किसी महात्मा की नहीं थी वह आते समय रास्ते में वह  एक दुकानदार को अंगूठी बेचते देखा उसे वह अंगूठी पसंद आ गई और उसने उस अंगूठी को खरीद लिया। उसने अपने पिता से झूठ बोला था कि मैं महात्मा से अंगूठी लिया हूं ।बट उसके पिता का बिलीव ने यह काम कर दिखाया और उसके पिताजी बिल्कुल ठीक हो गए बहुत समय के  बाद में उनकी  किसी अन्य कारण से उनकी मृत्यु हुई।


<!– –>

हमारे इस ब्रेन के ऊपर बहुत सारे सर्वे हुए हैं और खोजें की गई हैं कि हमारा ब्रेन कैसे काम करता है हमें यह समझना होगा कि हमारा ब्रेन कैसे काम करता है फिर हमें उस तरह से इस ब्रेन को अपने इच्छाओं को पूरा करने में लगाना है यह हमारे पूरे शरीर को कंट्रोल करता है तो वास्तव में हमे इसे समझना ही होगा।

Responses

Your email address will not be published.

+