जैसा हम सोचते है वैसा बनते है 



आज का जीवन इतना व्यस्त हो गया है कि लोग वास्तविक दुनिया को छोड़कर आभासी दुनिया में जी रहे है।  आज हम  अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान नहीं देते है । जो कि स्वास्थ्य हमारे जीवन के लिए बहुत ही जरूरी है ।  हम अपने हर दिन लगभग 60000 विचार को अपने दिमाग में सोचते है । जैसा कि अपने दैनिक जीवन में हर दिन किसी के संपर्क में आते है और अपने विचारो को उसके सामने रखते है या उसके बारे में बात करते है। आप जैसा दूसरो के लिए आप सोचते हो वो पहले आप पे होता है फिर बाद में उसपर होगा या नहीं इस बात पर डिपेंड करता है कि वो व्यक्ति उस विचार को कैसे लेता है । हमारा दिमाग उस तरह है जिस तरह बहुत भारी मशीन को एक इंसान उसके सीट पर बैठा स्टीयरिंग पकड़े उस बड़ी मशीन को कंट्रोल करता है उसी तरह से  हमारी इस शरीर को ये हमारा दिमाग कंट्रोल करता है । हम इस दिमाग के मालिक है आप चाहे जो कराए इससे ये करेगा । पर आप इससे कुछ भी न  कहे तब ये कुछ भी ग्रहण कर लेगा और आपके साथ वैसा ही होगा । इसलिए आप अपने दिमाग में अपने लक्ष्य को  बैठा लीजिए और इसे पूरा करने के लिए अपने दिमाग को आदेश दे और ये बिना किसी दिक्कत के पूरा कर देगा



दिमाग एक उपजाऊ जमीन के समान है पर आप इस भूमि में कुछ नहीं बोओगे तो ये इसमें ऑटोमैटिक ही घास – फूस उग आते है । आप इसमें जहर बो रहे है या फल बो रहे है ये जमीन को कोई फर्क नहीं पड़ता है । आप इसमें जैसा बोएगे वैसा आपको देगा ।  हमारे मस्तिष्क  में इतनी शक्ति होती है कि हम जो चाहे वो इससे करा सकते है ।

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