तेज़ाब!!!

ज़िन्दगी के हसीन लम्हे कब भयावह रूप ले लें, क्या पता… कब किसी अकारण हिंसा और दरिंदगी का शिकार बन जाएँ? एक मासूम, सुंदर लड़की रास्ते से जाए, कोई सरफिरा उससे प्यार करने का दावा करे, वो मना कर दे तो… तो क्या!! मेरी नहीं तो किसी की नहीं! तेज़ाब!!!

उसकी दर्दभरी आवाज़ कहती है-

मुझे माफ़ कर देना मेरे हमदम

मैं तुम्हारा प्यार समझ न पाई

तुम्हारे लाख समझाने पर भी

मैं अपनी आँखें खोल न पाई

लेकिन अब मैं तुम्हारा प्यार समझ गई हूँ

अब जब कोई मेरा हाथ नहीं थामेगा

क्या तुम मेरा सहारा बनोगे?

कौन मेरा साथ निभाएगा?

नहीं! नहीं!

वो नहीं देगा मेरा साथ

जब वो मेरी ज़िंदगी सँवार न सका

तो बर्बाद करने का हक कहाँ से पाया?

मेरे माता पिता के अश्रु पोंछ न सका

उन्हें दुख देने का साहस कहाँ से आया?

उसका अम्ल मेरे चेहरे को तो जला सकता

मगर मेरे हौसले को राख कर सकता नहीं

आएगी माँ काली करने गलत का सर्वनाश

तब उन्हें कोई रोक सकता नहीं।।

तब उन्हें कोई रोक सकता नहीं।।

-अरुणिमा गुप्ता

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