मेरी मौत 

 वो कहते हैं कि जिंदगी से प्यार करना चाहिए,

पर मुझे तो अपनी मौत प्यारी है।

 क्योंकि चाहती हूं मैं मरना एक तरीके से

उसी मौत को पाने के लिए यह जिंदगी जी रही हूं

किसी और से नहीं बल्कि हर दिन खुद से ही लड़ रही हूँ।

 वह मौत ना मिली तो यह जिंदगी बेमतलब ही खत्म हो जाएगी,

 और मेरी उस मौत को जीने की चाह मेरी चिता में ही सिमट कर रह जाएगी।

 जिंदगी में बस एक ही ख्वाहिश को दिल-ओ-जान से मांगा है,

मेरा पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हो बस इतना ही तो चाहा है।

 जिंदगी के जिस पल भी लगा कि छोड़ देना चाहिए इस ख्वाब को पूरा करने की ख्वाहिश को,

 मेरी मौत ने बड़े प्यार से मुझे फुसलाकर कहा,

” अगर इतनी कमजोर है तुम्हारी ख्वाहिश, तो छोड़ क्यों नहीं देती हो

 आम लोगों की तरह एक गुमनाम जिंदगी ही क्यों नहीं जी लेती हो।”

मेरी इस जिंदगी में उस मौत ने ही मेरा हौसला बढ़ाया है,

 और इसीलिए मेरी ख्वाहिश को पूरा करने का हक भी उसी ने पाया है।

 वो कहते हैं कि जिंदगी से प्यार करना चाहिए,

पर मुझे तो अपनी मौत प्यारी है।

Responses

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  1. Anonymous

    Beautifully written about death. The one who is not scared of discussing death is actually the one living a life in its true sense.