मेरी हसीन दुनिया

यह मेरी दुनिया मेरा घर है

जिसके निर्माता है परवरदिगार

यह कैसी आस्था, कैसी श्रद्धा है

उसी की रचना को कह रहे बेकार

दुनिया बुरी है के नारे

हर घर की कहानी है

दुनिया हम ही लोगों से बनी है

मैंने तो यही बात जानी है

दुनिया के साथ चलने में

खुद को बदलने लगे हैं

हर इंसान धोखा देगा

शक को ज़िन्दगी बनाने लगे हैं

अपनी ज़रूरत से लोगों से बात करना

धीरे धीरे ध्येय बनता जा रहा है

दूसरों की ज़रूरतों को समझना

फिर डर का कारण बनता जा रहा है

चार लोगों के धोखे काफी है

दुनिया को बुरा सिद्ध करने के लिए

चार हज़ार लोगों की मदद भी काफी नहीं

दुनिया को अच्छा बनाने के लिए

दुनिया के जैसा बनने में गौरव नहीं

सही करने का जज़्बा रखो

अपनी ही अंतरात्मा न धिक्कारे तुम्हें

दुनिया बदलने का हौसला रखो

-अरुणिमा गुप्ता

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