मेरे सुनहरे सफ़र को सुनहरा बनाने वाले 

यह बात है तबक़ी

जब मेरा जन्म था हुआ

नर्सिंग होम में मेरा आगमन था हुआ

सिसक सिसकर मैं रोने लगी थी

संसार पर जब मेरी पहली नज़र पड़ी थी

भूख के मारे होगया था हाल बुरा

तब मेरी माँ ने खिलाया गुड़ का टुकड़ा पूरा


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यह बात है तबक़ी

जब मैंने पहली बार था बोला 

तो सबसे पहले माँ शब्द था निकला

फिर मैंने रखा अपना पहला क़दम

जिसमें पापा की ऊँगली का सहारा था हरदम

यह बात है तबक़ी

जब मैं पहली बार स्कूल गयी थी

आँखो में मासूमियत मेरे भरी थी

पहली बार मैंने पढ़ा A B C D

जहाँ से शुरू हुई मेरी परीक्षा की सीढ़ी


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यह बातें आज जब मैं करती हूँ याद

इतने सालों बाद

की माता पिता वो हैं जिन्होंने हमें पाल पोसकर बड़ा किया 

हर ख़ुशी में थे वो शामिल , हर दुःख को है कम किया 

अगर वो ना होते तो हम सब कितना कुछ खोते यह आज मेने महसूस किया 

यह बात है तबक़ी

जब मेरी मुलाक़ात मेरे माता पिता से हुई

मेरे जीवन की हर मुराद है पूरी हुई 


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