रिश्ता यह कुछ खास है!

खून के रिश्तों की मोहताज नहीं

दोस्ती तो एक एहसास है

परायों से अपनों तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

दोस्ती की कामयाबी देख

बढ़ रहा अच्छाई पर विश्वास है

शक से भरोसे तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

मीलों दूर रहते हुए भी

दिलों के वो पास है

अकेलेपन से साथ तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

मतलब सिद्ध करना ध्येय नहीं

ज़िन्दगी भर का साथ ही आस है

स्वार्थ से निस्वार्थ तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

ज़िन्दगी के बुरे वक्त में

वही हमारे पास है

अश्रु से मुस्कान तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

हर मुश्किल घड़ी में

तुम्हारे होने का आभास है

व्यथा से सुकून तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

तुम्हारा साथ होने से ही

चल रही यह श्वास है

जन्म से मरण तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

बड़े बड़े मकानों में नहीं

एक दूसरे के हृदय में ही वास है

झोपड़ी से बंगले तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

दोस्ती की सच्चाई के सामने

सारे षड्यंत्रों का ह्रास है

बुराई से अच्छाई तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

भयभीत किसी से न होने दो

तुम्हारा साथ ही साहस है

डर से निडर तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

तुम जैसे दोस्त को पाकर

मिटी ज़िन्दगी की प्यास है

मुखौटों से वास्तविकता तक का

रिश्ता यह कुछ खास है

-अरुणिमा गुप्ता

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