रिश्ते प्यार के

जहाँ आत्मा भी एक दूसरे पर आश्रित हो

जहाँ जीवन ही एक दूसरे को समर्पित हो

जहाँ आँखों से ओझल होते ही खालीपन का एहसास हो

जहाँ हर पल एक दूसरे को महसूस करने की आस हो

जहाँ एक दूसरे को महफूज़ रखने की हर एक दुआ हो

जिसकी ताकत से पास कभी बुरी नज़र का न साया हो

जहाँ हर सुख दुख में साथ निभाने का वचन दिया हो

जिसके लिए कई बार विष का घूँट स्वयं ने पीया हो

जहाँ दोनों एक दूसरे के लिए त्याग की मूरत हो

जहाँ एक दूसरे के चेहरे की एक मुस्कान ही दोनों दिलों की हसरत हो

जहाँ चेहरे पर थोड़ी सी भी शिकन देख निवाला निगला जाता नहीं

जहाँ एक दूसरे को उदास देख मन संभल पाता नहीं

जहाँ कई रातें एक दूसरे पर न्योच्छावर हो जाती हो

जहां कई सुहानी शाम पुरानी यादों में खो जाती हो

जहाँ दिल की बातों को शब्दों की आवाज़ नहीं चाहिए हो

जहाँ मुस्कान भरी चुप्पी ही बहुत कुछ कह जाती हो

जहाँ रिश्तों की नींव इतनी गहरी हो

कि सात जन्मों तक मंज़िल वहीं ठहरी हो

वहीं पर यह प्रेम बंधन पनपता है

इस जन्म-जन्मान्तर के साथ से ही यह संसार महकता है। 

– अरुणिमा गुप्ता

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