विद्या का सदुपयोग

एक व्यक्ति जिसे पशु -पक्षियों से प्रेम था । वह  पशु- पक्षी, जानवरो का व्यापार करता था। उसे जब  पता चला कि उसके गुरु जानवरो कि भाषा समझने के लिए अपने गुरु के पास गया और उनकी सेवा करने लगा । गुरु जी उसके सेवा से बहुत खुश हुए और उन्होंने  कहा कि हे शिष्य ! तुमने मेरी बहुत सेवा कि है मै तुम्हारी सेवा से प्रसन्न हूं । बताओ तुम्हारी क्या इक्षा है । तब व्यक्ति ने कहा कि – आप मुझे इन जानवरो कि बोली समझने की शिक्षा दे दीजिए ।

तब गुरु ने  कहा कि मैं  सीखा दूगा पर तुम इसे आपने लाभ और किसी और के नुकसान के लिए इसका प्रयोग मत करना । तब गुरु ने उसे जानवरो कि भाषा समझने कि शिक्षा दी। जब वह सीख गया तब वह अपने घर गया तब उसने अपने दो जोड़ी कबूतरों को कहते सुना कि उनके मालिक के घोड़े मरने वाले है । तब वह व्यक्ति अगले दिन ही अपने घोड़े को ज्यादा दामो पर बेच आया । और अगले दिन ख़बर आती है कि उसके बेचे गए घोड़े की मृत्यु हो गई । उस व्यक्ति को कोई हानि नहीं हुई और वह खुश था । उस विश्वास हो गया था कि पशु पक्षी जो कहते है सही होता है।

अगले दिन जब वह व्यक्ति  अपने  कुत्तों को कहते सुना  कि  उसके मालिक के मुर्गी जल्दी ही मरने वाली है तब उस व्यक्ती न्यून मुर्गियों को तुरंत बाज़ार में बेच आया और  अगले दिन प्ता चला कि अधिकतर मुर्गियां महामारी की वजह से मर गई थी ।  वह व्यक्ति बहुत खुश था क्योंकि वह हानि में होने से बच गया था। इसी तरह से चलता रहा ।

एक दिन वह जब अपने  बिल्लियों कि कहते सुना कि उसके मालिक अब मरने वाले है । तब उसे विश्वास नहीं हुआ और आगे बड़ा तब वह अपने  गधे  को भी कहते सुना कि उसके मालिक मरने वाला है । तब वह  अपने गुरु के पास गया और अपने गुरु से बोला कि गुरुजी आप बताइए कि  मुझे कुछ काम करना है तो बता दीजिए क्योंकि मेरी मृत्यु निकट आने वाली मैंने अपने जानवरो को कहते सुना है । 

तब गुरु जी ने उसे डांटा और बोला कि की मै तुमसे बोला था कि तुम इस विद्या का इस्तेमाल अपने हित में और दूसरो के नुकसान के लिए नहीं करोगे  क्योंकि  सिद्धियां किसी की  न हुई है  न किसी की होगी।

Responses

Your email address will not be published.

+