विश्वास हूँ मैं

निराश हूँ मैं

अपने ही आप से हताश हूँ मैं

जीतना चाहती थी पर हार गई

शर्मसार हूँ मैं

निराश हूँ मैं

लोगों के सामने शायद खुश हूँ मैं

पर अपने अंदर ही बिखरी हूँ मैं

टूट गयी हूँ, परेशान हूँ मैं

अपने ही आप से हताश हूँ मैं

सपने दूर जाते दिख रहे हैं

झूठी तसल्ली दिलासा नहीं दे पा रही

अपने भरोसे को चूर चूर होते देख

निराश हूँ मैं

अपने ही आप से हताश हूँ मैं

नित्य सूरज की उगती किरण से

सकारात्मकता भरती हूँ मैं

टूटी हूँ, बिखरी हूँ, परंतु

ज़िन्दगी से हारी नहीं हूँ मैं

लोगों की ज़िंदगी का काश हूँ मैं

आज निराश हूँ, हताश हूँ, किन्तु

अपने ही जीवन का विश्वास हूँ मैं।

-अरुणिमा गुप्ता

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