वो कहते थे…

संघर्ष जीवन का दूसरा नाम है, 

वो कहते थे।

पर क्यों इस जीवन को जीना है, 

ये नही बताते थे।

 मां देवी का रूप होती है,

वो कहते थे।

पर क्यों उस देवी को पैरो तले रौंध दिया जाता है,

ये नही बताते थे।

 बहन की रक्षा भाई का धर्म है,

वो कहते थे ।

पर क्यों दूसरी बहन की आबरू को लूट लिया जाता है,

ये नही बताते थे।

 किसी की चीज़ नही चुरानी है,

वो कहते थे।

पर क्यों सांस लेने की आज़ादी तक चुरा ली जाती है,

ये नही बताते थे।

लड़के लड़कियों को नही रुलाते ,

वो कहते थे।

पर तेज़ाब फेंक क्यों चले जाते है,

ये नही बताते थे।

 बेटियों का पढ़ना लिखना ज़रूरी है ,

वो कहते थे।

पर नृत्य संगीत क्यों भाँडो का काम है,

ये नही बताते थे।

 दुपट्टे से सिर ढकना प्रभू का आदर है,

वो कहते थे।

पर उसी प्रभु के नाम क्यों दुपट्टे उतार देते है,

ये नही बताते थे।

 आस्था ,प्रेम,समर्पण भक्ति के प्रतीक है,

वो कहते थे।

पर क्यों आस्था के नाम भक्तो की इज़्ज़त से खेल जाता है,

ये नही बताते थे।

तुम्हारी मुस्कुराहट सबसे ज़रूरी है,

वो कहते थे।

पर जज़्बातों से खेल क्यों सबसे बड़ा नासूर बन गये,

ये नही बताते थे।

मुश्किलो का डटकर सामना करना है,

वो कहते थे।

पर क्यों नज़र उठाना भी खौफनाक हो गया,

ये नही बताते थे।

 समाज बदल रहा है,तरक्की कर रहा है,

वो कहते थे।

पर जड़े आज भी क्यों खोखली है,

ये नही बताते थे।

 संघर्ष जीवन का दूसरा नाम है,

वो कहते थे।

पर आखिर क्यों ऐसे जीवन को जीना है, 

ये नही बताते थे।

     – विजेता शेखावत

 

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