वो, जो मुझे , मुझसे भी ज्यादा जानती  है!

वो हर पल जो मेरे साथ थी, 

वो हर दिन स्कूल जाने का जो राज़ थी,

वो आज भी है मेरे पास,

साथ बैठते तो नहीं हम पहले की तरह,

परंतु हर वक्त याद करते है तुम्हे ,

जब भी कोई और आके बैठता है ,

हमारे पास, तुम्हारी जगह…

वो जो मेरी हर बात इत्मिनान से सुना करती थी,

वो जो मेरे घटिया चुटकूलो पर भी हस लिया करती थी,

वो जो किसी से मेरी बुराई ना सुन पाया करती थी,

वो आज भी है मेरे साथ,

फर्क इतना है बस,

फोन पर होती है बात…

वो जो मेरा खाना खा जाया करती थी,

वो जिसके साथ मैं भी पढ लिया करती थी,

वो जिसको मेरी मॉ भी पसंद किया करती थी,

याद बहुत आती हैं तुम्हारी ,

बस फर्क इतना सा है कि अब ज़िक्र नही किया करती मैं,

क्योकि दर्द होगा तुम्हें भी…

वो जो मेरी खामोशी मे भी शब्द ढूंड लिया करती थी,

वो जो मेरे बोलने से प्हले मेरी बात समझ लिया करती थी,

वो जो मुझे , मुझसे भी ज्यादा जानती थी,

आज भी वो मेरे गम मे ,

मेरा साथ निभाती है,

रोते हुए भी वो, मुझे हसाया करती है,

दूरिया कितनी भी हो,

अपने होने का अहसास दिलाती है,

एक दोस्त है, जो मुझे ,मुझसे भी ज्यादा जानती है!


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School provides  us with Lifelines!

कहते है लोग ,

ग़लतफ़हमी , नज़र-अंदाज़,खफा कुछ ज़रियें थे जुदा होने के,

इतनी कमज़ोर थी क्या दोस्ती कि तुम यू मुँह मोड गए,

ऐसी भी क्या बेवफाई थी,

कि तुम सब कुछ छोड गए?

दोस्ती एक बहाना होता है  साथ निभाने का,

दुशमनी एक ठिकाना होता है,

और करीब आने का,

फर्क केवल इतना सा है,

अकसर ज्यादातर लोग छोडकर चले जाया करते है,

और जो ज़िदगीभर साथ निभाले,

जनाब , वही सच्चे दोस्त कहलाते है!

कौन है ‘वो’ ? कहॉ है ‘वो’? कैसी है ‘वो’ ?

दूसरा अंश-

https://motivationpedia.com/%E0%A4%B5%E0%A5%8B/


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Laces of my shoes to tie my life!

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