वो …

दोस्ती…

वो हर मुस्कान की वजह,

वो हर दर्द का इलाज,

वो हर शाम का साथ,

वो हर ऑसु का राज़,

दोस्ती…

“जो हर बुरे दिन में मिठास भरदे और हर टुट्टे दिल का ज़खम भरदे, वह है दोस्ती।”

पहला अंश-

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वो …

वो एक कहानी है, जिसके बिना मेरी कहानी अधूरी है।

वो एक शब्द है, जिसके बिना मेरी पहेली अधूरी है।

वो मेरे बदसूरत चित्र का , सबसे सुंदर अंश हैं।

वो एक आवाज़ है, जो मेरा दिन बुरा होते हुए भी ,मुझे दुखी नहीं होने देती।

वो एक सुर है, जिसकी वजह से मेरा गीत बना है।

वो एक लव्ज़ है , जो मेरे दर्द में मरहम कि तरह काम करता है।

वो मेरी जादू की छडीं है, जो मेरी हर परेशानी दूर तो नहीं कर पाती परंतु वो हर परिस्थिती मे मेरा साथ निभाती है।

वो दलदल मे मेरा पानी है , और बारिश मे मेरा छॉता।

सरदी मे वो मेरी रज़ाई  हैं, और गरमी मे मेरा कागज़ का पंखा।

वो अपने-आप मे एक छोटा सा घर है ,

जिसके ताले की चाबी केवल मेरे पास है।

वो मेरे लिए एक सच्चे दोस्त का सारांश हैं।

वो कौन है? कहॉ है ? कैसी है?

वो मेरे अंधेरे कमरे की वो बत्ती है जो कभी बुझती नहीं।

वो कहीं दूर होते हुए भी , मेरे दिल के सबसे करीब हैं।

वो ,

धोरी झल्ली सी है, धोरी पगली सी है,

बिन बात वो मुस्कुराती है, हर छोटी सी बात पर वो रो जाती है,

कभी बक-बक करते नहीं थकती और कभी एकदम से बिलकुल चुप हो जाती है।

बहुत अजीब है वो ,

शायद इसिलिए हमेशा मेरा खयाल रखती है।

जैसी भी है,

वो खुदमे एक कहानी हैं…

जिसके बिना मेरी कहानी अधूरी हैं।

क्योकि ‘वो’ केवल ‘वो’ हैं,

जो मेरी हर छुपी मुस्कान का राज़ जानती हैं।


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वो

 

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