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जीवन के रंग

जीवन में हर रंग का मज़ा लो हर दिन होली का पर्व बना लो अनगिनत रंग हैं इस दुनिया में इस छोटी सी ज़िन्दगी को इंद्रधनुष बना लो माँ के दुग्ध का श्वेत रंग हो गले में पहना वो पहले स्वर्ण आभूषण का संग हो वो काले मोती कलाई पर सजे वो चांदी की पायल…

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नव वर्ष का आगमन

मेरे सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ। आप सभी के कुशल भविष्य की कामना हेतु यह रचना मकर संक्रांति फिर लौट आएगी, होली के रंग भी पुनः बिखरेंगे गणपति बप्पा और माँ दुर्गा इस वर्ष भी हमारे साथ होंगे गणगौर और चौथ की मेहंदी से सभी सुहागिनों के हाथ रचे होंगे दीपावली पर…

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विश्वास हूँ मैं

निराश हूँ मैं अपने ही आप से हताश हूँ मैं जीतना चाहती थी पर हार गई शर्मसार हूँ मैं निराश हूँ मैं लोगों के सामने शायद खुश हूँ मैं पर अपने अंदर ही बिखरी हूँ मैं टूट गयी हूँ, परेशान हूँ मैं अपने ही आप से हताश हूँ मैं सपने दूर जाते दिख रहे हैं…

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युवा जाग जा

ज़िन्दगी की कश्मकश में हूँ चुप रहूँ या आवाज़ बनूँ मेरा भारत गलत हाथ में है सच अकेला, झूठ के सब साथ में हैं अपने अस्तित्व के लिए खड़ा होना भी भूल गया है इस देश का युवा झूठी शान में फूल गया है एक लड़का बैठे बैठे सिगरेट फूँक रहा था उसके पास बैठा…

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माँ की व्यथा

तेरे बिन मैं कैसे जी सकूँगी हर दिन जीते-जी मरूँगी तू साथ दे ना दे मैं तेरा सहारा बनूँगी बस मुझे छोड़कर न जा चंद पैसों के गुणगान मत गा तज दे यह मोह माया ना मिलेगा प्यार इन हाथों सा सच्चे सुकून की अनुभूति कर झूठी शौहरत के लिए ना मर पुत्र को जाता…

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तेज़ाब!!!

ज़िन्दगी के हसीन लम्हे कब भयावह रूप ले लें, क्या पता… कब किसी अकारण हिंसा और दरिंदगी का शिकार बन जाएँ? एक मासूम, सुंदर लड़की रास्ते से जाए, कोई सरफिरा उससे प्यार करने का दावा करे, वो मना कर दे तो… तो क्या!! मेरी नहीं तो किसी की नहीं! तेज़ाब!!! उसकी दर्दभरी आवाज़ कहती है-…