Author: poorva_kachhawha

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  खुद से कुछ बाते किया करती हूं …

यू तो हूं मैं सबके साथ खड़ी, पर रहती हूं इस पूरी भीड़ में भी अकेली। ये जुनून है मेरे अस्तित्व का, या सुकून है मेरे आलस्य का… इस शहर की महक सी अब मैं भी महकती हूं, रोज़ कुछ नया करने की सोचकर, हर पुरानी आदत मैं अपनी खोती हूं। ये इस शहर का कमाल…

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Mar 3

भारत

भारत

                       जब सो रहा था ये पूरा शहर, मैं खुद से ही लड़ रही थी हर पहर। जब उठा ये शहर लेकर अपने ज़हन में धुआ और राख, अपने देश की ऐसी स्तिथि देखकर मेरे सीने में लगी एक आग। आग थी वो ऐसी जो…

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एक वृक्ष की कहानी

लाश तुम्हारी देखकर चिता यूं ही जल जाती है मेरी, जलता तुम्हें देख कर राख यूं ही बन जाती है मेरी। पल पल तुम्हें मरता कटता देख यूंही हार जाती हूं मैं,  हर दिन तुम्हारी ऐसी हालत देखकर आंखों में पानी लिए ही सो जाती हूं मैं।  ये जो हमने अपने आलीशान महल बुने हैं,…

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मेरी मौत 

 वो कहते हैं कि जिंदगी से प्यार करना चाहिए, पर मुझे तो अपनी मौत प्यारी है।  क्योंकि चाहती हूं मैं मरना एक तरीके से उसी मौत को पाने के लिए यह जिंदगी जी रही हूं किसी और से नहीं बल्कि हर दिन खुद से ही लड़ रही हूँ।  वह मौत ना मिली तो यह जिंदगी…