Belief story


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एक बार की बात है एक नदी में एक मछली रहती थी। नदी में बाढ़ आ जाने के कारण पानी में बहाव के साथ आगे बढ़ते हुए मछली कुए में जा गिरी। उस कुएं में पहले से ही एक मेंढ़क रहता था।


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मेडक ने उससे पूछा कि तुम कौन हो? तब मछली ने बोला कि- मैं मछली हूं। फिर मेंढक ने पूछा कि तुम कहां से आई हो? मछली ने बोला कि मैं नदी से आई हूं। मेंढक ने फिर पूछा कि नदी कितनी बड़ी होती हैं।


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तब मछली ने बोला की नदी बहुत बड़ी होती है। फिर मेंढक अपने हाथों को बढ़ाता है और अपने हाथों की ओर इशारा करते हुए कहता है कि इतनी बड़ी होती होगी। तब मछली बोलती है कि नहीं, नदी बहुत बड़ी होती है। तब मेंढक अपने हाथों को थोड़ा सा और बढ़ाता है और कहता है कि इतनी बड़ी होती है क्या? मछली कहती है नहीं, नदी इससे बहुत बहुत बड़ी होती है। तब मेंढक अपने हाथों को पूरी तरह से खोल लेता है और कहता है तब तो इतनी ही बड़ी होती होगी तब मछली कहती है नहीं नदी इससे बहुत बहुत बहुत बड़ी होती है।


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अब सवाल यह है कि कौन सही है? यहां पर हम देखें तो अपने हिसाब से दोनों सही थे। क्योंकि मेंढक कभी बाहर निकल कर नदी को नहीं देखा था इसलिए वह कभी अनुमान नहीं लगा सकता की उस कुएं से भी बड़ी कोई चीज होती है । जबकि इसके विपरीत मछली नदी में रहती थी और कुएं में आ गई थी। जिससे उसे यह पता था की नदी कितनी बड़ी होती है और कुआ कितना छोटा होता है।          इसी तरह चीजें हमारी लाइफ में घटित होती हैं ।जब हमारे सामने ऐसी चीजों के बारे में बताया जाता हैं जिसे हम ना कभी सुने होते हैं ना कभी किसी को करते देखते हैं अचानक से कोई आकर हमें ऐसी बातें बताने लगता है तो हमारे बस से वह चीजें बाहर की हो जाती है और हम उसे समझ नहीं पाते हैं। इसके बजाय की हम उस पर विश्वास करके उसकी बातों को समझे और अपने दिमाग खोल कर देखें क्या सचमुच में ऐसी चीजें होती हैं तब जा कर हम समझ पाएंगे। 

        

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