Category Archives: Poems

माँ

माँ

रिश्तों की इतनी समझ तो नहीं थी मुझे आँख खुलते ही माँ का आँचल देखा था पहली बार पलक भी न झपकी थी कि निःस्वार्थ प्रेम का वो उदाहरण देखा था चेहरे की उस मुस्कान का कोई मोल नहीं है उस अनमोल तोहफे को सदा संजोए रखना जिसकी खामोशी का एहसास हर पल होता है…

माँ

माँ

रिश्तों की इतनी समझ तो नहीं थी मुझे आँख खुलते ही माँ का आँचल देखा था पहली बार पलक भी न झपकी थी कि निःस्वार्थ प्रेम का वो उदाहरण देखा था चेहरे की उस मुस्कान का कोई मोल नहीं है उस अनमोल तोहफे को सदा संजोए रखना जिसकी खामोशी का एहसास हर पल होता है…

रिश्ते प्यार के

रिश्ते प्यार के

जहाँ आत्मा भी एक दूसरे पर आश्रित हो जहाँ जीवन ही एक दूसरे को समर्पित हो जहाँ आँखों से ओझल होते ही खालीपन का एहसास हो जहाँ हर पल एक दूसरे को महसूस करने की आस हो जहाँ एक दूसरे को महफूज़ रखने की हर एक दुआ हो जिसकी ताकत से पास कभी बुरी नज़र…

घर याद आता हैं मुझे

घर याद आता हैं मुझे

मुझे घर याद आता हैं…. जहाँ मैं छोटे से बड़ा हुआ, जहाँ ज़िंदगी के 18 बरस गुजारे, वो आँगन जहाँ से मैने आगे बढ़ना सिखा … आज बहुत याद आता है, हाँ, आज मुझे मेरा घर याद आता हैं | वो घर जहाँ मुझे मिला माँ का प्यार,पापा की प्यार वाली पडी मार, वो घर…

एक अधूरा ख़्वाब

एक अधूरा ख़्वाब

उसकी आदत थी, वो कभी कुछ कहती ही नहीं , ईशारे तो दुर, वो कभी मुझे देखती ही नहीं | पास होकर भी, रोज दुर हों जाते थे हम | दिलो से दिलो की, मुलाकात हीं नहीं होती | सोचता था हर रोज, की आज तो वो मुझें देखेगी जरूर | इसलिए, सज-सँवर कर निकल…

  खुद से कुछ बाते किया करती हूं …

  खुद से कुछ बाते किया करती हूं …

यू तो हूं मैं सबके साथ खड़ी, पर रहती हूं इस पूरी भीड़ में भी अकेली। ये जुनून है मेरे अस्तित्व का, या सुकून है मेरे आलस्य का… इस शहर की महक सी अब मैं भी महकती हूं, रोज़ कुछ नया करने की सोचकर, हर पुरानी आदत मैं अपनी खोती हूं। ये इस शहर का कमाल…