For dedicated people

उस वक़्त मै खुद को सबसे अधिक मजबूत पाता हूं जब मैं अकेले होता हूं,मेरी कोई सहायता नहीं करता।उसी समय  मेरी मुलाकात मुझसे होती है।मुझे पता चलता है मेरा वजूद।


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मैकेनिकल इंजीनियर होने के नाते मेरी राय है कि चलने दे अपने ऊपर हैमर को,कर सामना ग्राइंडर से,दे चुनौती ब्रोच को,झोंक दे खुद को वात्या में;तब जाकर तेरी पहचान तुझसे शायद हो पाए।शायद इसलिए क्योंकि तुझे अंत में हीट ट्रीटमेंट, सर्फेस फिनिश ,लुब्रिकेशन की जरूरत है।कहने का मतलब यह है कि पहले खुद को स्ट्रैंथ दो,फिर स्टैंड दो,तब जाकर तुझमें स्थायित्व आयेगा।

मेरी लड़ाई मुझसे है,अगर मै खुद से जीत गया;तो तुझे पछाड़ने में वक़्त कि जरुरत ही नहीं पड़ेगी।


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इस कलयुग में तुम ही पत्थर हो, तुम ही जौहरी।

तेरी लड़ाई तुझसे शुरू,मैदान तू पहलवान तू,हो सकता है विजेता तू,बस देरी है पहचान तुम्हारी तुझसे,गर हो गई ;तो हो सकता है विजेता तू।

If you are comfortable with yourself,you may be comfortable with the whole world.

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