Motivational story

एक बार की बात है एक लड़का था उसको जूडो सीखने का बड़ा शौक था। पर उसका दाहिना हाथ नहीं था। किसी एक्सीडेंट के कारण वह अपना दाहिना हाथ खो चुका था। भजन अपने माता पिता से सीखने की बात कहता तो उसके माता पिता उसे कहते कि तुम्हारे तो हाथ ही नहीं है ।तो तुम कैसे सीख पाओगे यह कुछ दिन तक चलता रहा ।पर जैसे- जैसे वह बड़ा हो रहा था वैसे- वैसे उसकी जीत बढ़ती जा रही थी। उसके माता-पिता भी उसके जीत के आगे हार मान गए और उससे कहा चलो ठीक है हम कल जोड़ो मास्टर के पास चलेंगे ।अगर वह तुम्हें सिखाने के लिए राजी हो गए तो तुम सीख लेना।


<!– –>

  वह लड़का बहुत खुश हो गया। जब कल उसके माता-पिता और वह लड़का जूडो मास्टर के पास गए और मास्टर से बोले कि आप मेरे लड़के को जूडो सिखा दीजिए। तो उस मास्टर ने अपनी नजर उस लड़के के ऊपर दौड़ आई उस लड़के को देख कर उसने बोला कि इसके तो हाथ ही नहीं है तो यह कैसे जूडो सीखेगा। जब वह लड़का उन मास्टर की बातें सुनकर ज़िद करने लगा कि नहीं मुझे जूडो सीखना है सीखना है। उस लड़के की लगन को देखकर। वह मास्टर मान गया और उसे जोड़ों की ट्रेनिंग के लिए कल बुलाया। वह लड़का मास्टर के पास कल आया मास्टर ने उसे जूडो सिखानी स्टार्ट कर दी। मास्टर ने उस लड़के को एक दाव बता दिया और कहा कि तुम इसकी प्रैक्टिस करो। वह लड़का मास्टर की बातें सुनकर प्रैक्टिस में  लग गया। वह रोज वहीं दाव का प्रेक्टिस करता था। जबकि उसके साथ आए अन्य लड़के को मास्टर अलग-अलग दाव सिखाते। यह देख लड़के के मन में प्रश्न उठता की मास्टर मुझे एक ही दाव क्यों सीखा रहे हैं, जबकि वह अन्य लड़कों को रोजाना नया नया दाव सिखा रहे हैं। यह प्रक्रिया 1 महीने तक चलती रहे लेकिन उस लड़के ने मास्टर से कुछ नहीं कहा क्योंकि मास्टर से उसने वादा किया था कि वह जो कहेगा वह उसे करेगा। इस इस तरह से 2 महीने निकल गए और सीखते सीखते उसी दाव को 1 साल हो गए। 


<!– –>

अब उसके मन में प्रश्न के हल कोरे चलने लगे उससे रहा नहीं गया और उसने मास्टर के पास गया और पूछा कि मास्टर आप मुझे एक ही दाव क्यों सिखा रहे हो? जबकि आप अन्य लड़कों को अलग-अलग दाव सिखाते हो। तो उस लड़के की बात सुनकर मास्टर ने कहा कि तुम्हें मुझ पर विश्वास है कि नहीं तब लड़के ने कहा कि मास्टर मुझे आप पर पूरा विश्वास है। तब मास्टर ने कहा कि जाओ तुम अपने दाव कि प्रैक्टिस करो। लड़का चुपचाप फिर अपने दाव कि प्रैक्टिस करने लगा। अब उस लड़के को वह दाव सीखते- सीखते 10 साल गुजर चुके थे और वह लड़का उस दाव का मास्टर बन चुका था।


<!– –>

 अब बारी थी जूडो के नए मास्टर को चुनने की इसलिए सभी लड़कों को बुलाया गया और उनमें एक कंपटीशन रखा गया और जो उस कंपटीशन को जीतेगा वहीं मास्टर बनेगा। कंपटीशन शुरू हुआ पहली पारी में उस लड़के का सामना एक ज्यादा दाव सीखे लड़के से हुआ। उस लड़के पर या ज्यादा भारी पड़ रहा था। पर वह उससे लड़ रहा था और लास्ट में वह जीत जाता  है। अब लास्ट पारी की बारी आती है। तो उस लड़के का सामना एक बहुत अनुभवी लड़के से होता है जूडो भयंकर चलता है और लड़का नीचे गिर जाता है लेकिन वह लड़का अपने जिस दाव में माहिर था अचानक तेजी से उठा और उस दाव का पूरी जोर से प्रयोग करके उसे दे मारा और वह लड़का उसके वार से नीचे जा गिरा और दोबारा उठा नहीं और जीत एक हाथ वाले लड़के की हो गई और उसे मास्टर बना दिया गया 


<!– –>

लेकिन इस लड़के के दिमाग में एक सवाल चल रहा था की आखिरकार मैं क्यों जीत गया ?मेरे से ज्यादा दांव सीखने वाले यहां पर लड़के थे ।जिनके हाथ पैर सब सलामत थे। वह यह जाने के लिए अपने मास्टर के पास गया और उनसे यह सवाल पूछा तब मास्टर ने कहा की जो मैंने तुम्हें दाव सिखाई थी ।वह दाव बहुत कठिन दाव है जिसे सीखना कोई मामूली बात नहीं है। क्योंकि तुम 10 साल तक केवल एक ही दाव का प्रयोग कर रहे थे ।इसलिए तुम इस दाव में मास्टर बन चुके थे और तुम्हारे जैसा कोई इस दाव का प्रयोग नहीं कर सकता है। इस दाव से बचने का केवल एक ही तरीका है तुम्हारे दाहिने हाथ को पकड़कर तुमसे डिफेंस किया जाए जो कि तुम्हारे पास है ही नहीं तो कोई चांस बनता ही नहीं कि तुम्हें कोई हरा दे। क्योंकि तुम्हारे पास तो दाहिन हाथ ही नहीं है। तब उस लड़के को समझ में आता है की मास्टर ने मुझे क्यों एक ही दांव सीखने के लिए कहा था।  


<!– –>

                                                                                         moral of story–हमारे माता-पिता या जो भी हमारा भला चाहता है वह जो भी हमारे लिए करता है उसके पीछे कोई कारण होता है वह हमेशा सही होता है।                          हमें कठिनाइयों से नहीं डरना चाहिए जबकि उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए।

Responses

Your email address will not be published.

+