To know yourself this story 


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एक बार की बात है एक कुएं में बहुत सारे मेढ़क रहते थे । उनके मन में एक बार इच्छा हुई की चलो इस कुएं से निकलकर बाहर की दुनिया को देखा जाय तब उनकी यह इच्छा इतना बढ़ गया की सब मेंढक बाहर निकलने  के लिए प्रयास करने लगे । जब मेंढक कुएं कि दीवार पर चढ़ने लगे तब वह दीवार पर कुछ ऊपर तक चढ़ते थे और उतने ऊपर से सरक आते थे वह बार बार चढ़ने  का  प्रयास करते रहे जब तक कि वह थक ना गए और  मेंढ़कों की यह सोच बन गई की कभी भी इस कुएं से बाहर नहीं निकला जा सकता और जो भी कोई  चढ़ने का प्रयास करता तो उनसे कहते थे कि तुम नहीं चढ़ पाओगे क्योंकि मैने बहुत बार चढ़ने का प्रयास किया है लेकिन चढ नहीं पाया इसलिए तुम अपना समय चढ़ने में समय बर्बाद मत करो जाओ तुम कोई और काम करो। जब कोई भी मेंढक चढ़ने जाता उसकी बातें सुनकर वापस चला आता था। एक दिन ऐसा हुआ की एक मेंढक उसके सामने से गुजरा तब दूसरे मेंढक अपनी पुरानी बातें को दोहराने लगा लेकिन वह मेंढक रुका नहीं आगे बढ़ गया और चढ़ने का प्रयास करने लगा जब वह प्रयास कर रहा था तब सभी मेंढक उसे  देखने लगे और कहने लगे देखो कि यह पागल हो गया है इतने बड़े बड़े हमारे बुजुर्ग जो अनुभवी हैं वह पार नहीं कर पाए तो यह क्या पार कर पाएगा। लेकिन वह मेंढक रूका नहीं वह बार-बार चढ़ने का प्रयास करने लगा। ऐसा लग रहा था कि उन लोगों की बातों का उस मेंढक पर कोई प्रभाव ही ना हो रहा हो और वह लगातार जी जान से उस दीवार पर चढ रहा था। बार-बार वह चढ रहा था और गिर जा रहा था लेकिन वह रुका नहीं वह प्रयास करता रहा और अंत में हुआ यह की वह उस दीवार को चढ़कर बाहर निकल गया और वह इस सुंदर दुनिया में विचरण करने लगा। अगर बात करें कि वह मेंढक क्यों चढ पाया उस दीवार पर क्योंकि वह बहरा था इसलिए वह किसी की बातों को नहीं सुना और लगातार प्रयास करने से उस दीवार को पार कर गया।


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Moral of story- इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हमारे अंदर इतनी शक्ति है कि हम जो चाहे वह कर सकते हैं बस हमें उन बातों पर नहीं ध्यान देना है जो हमें नीचे की ओर ले जाती हैं और हमें लगातार अपने लक्ष्य को पाने के लिए प्रयास करते रहना होगा।

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